वास्तव में इन्हीं पुस्तकों से मनुष्य पागल बनता है।’’
पुस्तकों का वैषम्य
बारी साहब स्वयं अल्प शिक्षित थे, अतः या तो ईष्र्यावश अथवा इस कारण कि शिक्षित बंदी पोर्ट ब्लेअर के इस परमेशवर के रोब में नहीं आते, अथवा दोनों कारणों के चलते, जो भी हो, परंतु बारी तथा एक-दो सुपरिंटेंडेंट भी पुस्तक पढ़ने का नाम लेते ही द्वेष से भर जाते। कोई बंदी यदि तंबाकू फांकता हो तो बारी उसकी ओर ध्यान नहीं देते, उसे छोड़ देते और अपनी इसी दयाशीलता का वर्णन करते,
वास्तव में इन्हीं पुस्तकों से मनुष्य पागल बनता है।’’
पुस्तकों का वैषम्य
बारी साहब स्वयं अल्प शिक्षित थे, अतः या तो ईष्र्यावश अथवा इस कारण कि शिक्षित बंदी पोर्ट ब्लेअर के इस परमेशवर के रोब में नहीं आते, अथवा दोनों कारणों के चलते, जो भी हो, परंतु बारी तथा एक-दो सुपरिंटेंडेंट भी पुस्तक पढ़ने का नाम लेते ही द्वेष से भर जाते। कोई बंदी यदि तंबाकू फांकता हो तो बारी उसकी ओर ध्यान नहीं देते, उसे छोड़ देते और अपनी इसी दयाशीलता का वर्णन करते,