वरिष्ठ अधिकारियों में भी रूढ़ थे और इसलिए उनकी निश्चित राय बन चुकी थी कि कारागृह में ऐसी किसी भी तरह की ऐतिहासिक पुस्तकें, जो इन म्लान, हताश, त्रस्त राजबंदियों को संजीवनी देती हैं, देना उन्हें सुधारने अथवा उन्हें दंडित करने के लिए बंदीगृह में रखनेवाले दंडविज्ञान के उद्देश्य को विफल करना है। ‘ऐतिहासिक अथवा धार्मिक पुस्तकें पढ़कर उनके निराश तथा निरूत्साही मनः पुनः आशावान, स्वाभिमान एवं उत्साही बन जाते हैं और बंदीगृह में ही
वरिष्ठ अधिकारियों में भी रूढ़ थे और इसलिए उनकी निश्चित राय बन चुकी थी कि कारागृह में ऐसी किसी भी तरह की ऐतिहासिक पुस्तकें, जो इन म्लान, हताश, त्रस्त राजबंदियों को संजीवनी देती हैं, देना उन्हें सुधारने अथवा उन्हें दंडित करने के लिए बंदीगृह में रखनेवाले दंडविज्ञान के उद्देश्य को विफल करना है। ‘ऐतिहासिक अथवा धार्मिक पुस्तकें पढ़कर उनके निराश तथा निरूत्साही मनः पुनः आशावान, स्वाभिमान एवं उत्साही बन जाते हैं और बंदीगृह में ही