मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

‘बारी आता है’ अथवा कज जमादार ‘ऐ बम-गोलेवालो, तुम बड़े बेशर्म लोग हो, फिर बन गया जमघट? जाओ, घास काटो, उठते हो या नहीं’ कहता हुआ गाली-गलौज करते हुए आ धमकता। किसी के भी आते ही वक्ता-श्रोताओं के साथ गोष्ठी भागने लगती और उसके छिन्न-भिन्न सदस्यों में से कोई घास में, तो कोई टीन की आड़ में, तो कोई बरतन के बहाने दुबककर बैठता। पुनः वह आंधी थम जाने के पश्चात् वह बैठक, जैसे कि पहले वर्णन किया है-‘स्मज जीम स्महपवदे जीनदकमत चंेज ंदक


596 of 2228

‘बारी आता है’ अथवा कज जमादार ‘ऐ बम-गोलेवालो, तुम बड़े बेशर्म लोग हो, फिर बन गया जमघट? जाओ, घास काटो, उठते हो या नहीं’ कहता हुआ गाली-गलौज करते हुए आ धमकता। किसी के भी आते ही वक्ता-श्रोताओं के साथ गोष्ठी भागने लगती और उसके छिन्न-भिन्न सदस्यों में से कोई घास में, तो कोई टीन की आड़ में, तो कोई बरतन के बहाने दुबककर बैठता। पुनः वह आंधी थम जाने के पश्चात् वह बैठक, जैसे कि पहले वर्णन किया है-‘स्मज जीम स्महपवदे जीनदकमत चंेज ंदक


596 of 2228