ही रोमन लोगों के आने की आहट होती और तुरंत भगदड़ मचती। पुनः असवर मिलते ही एकत्रित होकर प्रार्थना पूरी की जाती। ये भागती गोष्ठियां इसी प्रकार की भागती प्रार्थनाएं थी। कारागृह की अधोगति को मल भर के लिए रोककर ये गोष्ठियां मन को उच्चता, उदात्तता की ओर उन्मुख करती । अंदमान के उस बंदीवास में रविवार का यह ‘भजन’ मैंने वर्षों इसी तरह चालू रखा था। उसमें कितनी सारी राजनीतिक, धार्मिक, भाषाशास्त्र विषयक, साहित्यिक, शास्त्रीय आदि विषयों
ही रोमन लोगों के आने की आहट होती और तुरंत भगदड़ मचती। पुनः असवर मिलते ही एकत्रित होकर प्रार्थना पूरी की जाती। ये भागती गोष्ठियां इसी प्रकार की भागती प्रार्थनाएं थी। कारागृह की अधोगति को मल भर के लिए रोककर ये गोष्ठियां मन को उच्चता, उदात्तता की ओर उन्मुख करती । अंदमान के उस बंदीवास में रविवार का यह ‘भजन’ मैंने वर्षों इसी तरह चालू रखा था। उसमें कितनी सारी राजनीतिक, धार्मिक, भाषाशास्त्र विषयक, साहित्यिक, शास्त्रीय आदि विषयों