मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

की ऊहापोह तथा चर्चा हुई होगी। कभी-कभी मन को संतोष भी मिलता कि बाल्याकाल में नासिक के पश्चात् पुणे में, पुणे के पश्चात् बंबई में, बंबई के उपरांत इंग्लैंड में और इंग्लैंड के पश्चात् अब अंदमान के कारागृह में भी रविवार का वह राष्ट्रीय भजन और राष्ट्रीय ज्ञान सत्र निरंतर चालू रखना संभव हुआ। उस नियम का पालन संभव हुआ। कभी होम के विस्तीर्ण स्थंडिल में तो कभी विश्वदेव के बित्तो कुंड में, परंतु अग्नि की आहुति टल नहीं सकी। इसीलिए तो अग्नि जीवित रही।


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की ऊहापोह तथा चर्चा हुई होगी। कभी-कभी मन को संतोष भी मिलता कि बाल्याकाल में नासिक के पश्चात् पुणे में, पुणे के पश्चात् बंबई में, बंबई के उपरांत इंग्लैंड में और इंग्लैंड के पश्चात् अब अंदमान के कारागृह में भी रविवार का वह राष्ट्रीय भजन और राष्ट्रीय ज्ञान सत्र निरंतर चालू रखना संभव हुआ। उस नियम का पालन संभव हुआ। कभी होम के विस्तीर्ण स्थंडिल में तो कभी विश्वदेव के बित्तो कुंड में, परंतु अग्नि की आहुति टल नहीं सकी। इसीलिए तो अग्नि जीवित रही।


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