सलाई का छोटा सा टुकड़ा, जिसकी ऊपरी लकड़ी भी निकाल दी गई है और जिसे अंगुलियों में पकड़ना भी कठिन होता था, इतनी सामग्री तो अवश्य होती थीं। यह सामग्री कभी मुंह में, तो कभी बालों में, तो कभी इस हाथ की तलाशी लेते समय उस हाथ में, नही ंतो एकदम ं ं ं ंनहीं बंदीगृह के अतिगोपनीय तथ्य का उद्घाटन नहीं करेंगे। हमारी सारी युक्तियांे की पोल खुल गई तो पुनः कभी इस तरह की यात्रा का प्रसंग आने पर कागज-पेंसिल छिपाना कठिन ही होगा न!
परंतु
सलाई का छोटा सा टुकड़ा, जिसकी ऊपरी लकड़ी भी निकाल दी गई है और जिसे अंगुलियों में पकड़ना भी कठिन होता था, इतनी सामग्री तो अवश्य होती थीं। यह सामग्री कभी मुंह में, तो कभी बालों में, तो कभी इस हाथ की तलाशी लेते समय उस हाथ में, नही ंतो एकदम ं ं ं ंनहीं बंदीगृह के अतिगोपनीय तथ्य का उद्घाटन नहीं करेंगे। हमारी सारी युक्तियांे की पोल खुल गई तो पुनः कभी इस तरह की यात्रा का प्रसंग आने पर कागज-पेंसिल छिपाना कठिन ही होगा न!
परंतु