काल की कालमर्यादा की टिप्पणी हमने कोठरी में एक लंबा सा कागज जाकल उसपर उतारी। दूसरे दिन वह पुस्तक लौटाने के पश्चात् शाम को द्वार बंद होने पर आराम से उसक कागज को निकालकर मैं पढ़ना आरंभ कर ही रहा था कि इतने में खट-खट जूते खड़काते असमय मेरी तलाशी लेने के लिए ओवरसीयर साहब आए और दरवाजा खोलकर मेरी तलाशी लेने लगे। मेरी तो कभी-कभी दिन में तीन बार तलाशी ली जाती। जब बारी ने अनुभव किया कि सौ में दो बार भी यह समाचार सत्य नहीं निकला, तब कहीं जाकर तलाशी का यह क्रम समाप्त हुआ।
काल की कालमर्यादा की टिप्पणी हमने कोठरी में एक लंबा सा कागज जाकल उसपर उतारी। दूसरे दिन वह पुस्तक लौटाने के पश्चात् शाम को द्वार बंद होने पर आराम से उसक कागज को निकालकर मैं पढ़ना आरंभ कर ही रहा था कि इतने में खट-खट जूते खड़काते असमय मेरी तलाशी लेने के लिए ओवरसीयर साहब आए और दरवाजा खोलकर मेरी तलाशी लेने लगे। मेरी तो कभी-कभी दिन में तीन बार तलाशी ली जाती। जब बारी ने अनुभव किया कि सौ में दो बार भी यह समाचार सत्य नहीं निकला, तब कहीं जाकर तलाशी का यह क्रम समाप्त हुआ।