ऐतिहासिक, अर्थशास्त्रीय और शासनशास्त्रीय विघातक
कार्य भी बिना ज्ञान के उचित ढंग से नहीं किया जा सकता। तब तो वह सर्वथा ही असंभव है। ईरान का ही उदाहरण लीजिए। राज्य क्रांति हो गई, परंतु राज्य संस्थापन और संवर्धन के लिए आवश्यक विधायक पारंगतता क्रांतिकारियों में तो नहीं थी जितनी िकवह आवश्यक थी, अतः अमेरिका से आय-व्यय में निपुण व्यक्ति को लाना पड़ा और अर्थव्यवस्था जैसे अत्यंत महत्तवपूर्ण कार्य में दूसरे के हाथ से पानी पीना पड़ा,
ऐतिहासिक, अर्थशास्त्रीय और शासनशास्त्रीय विघातक
कार्य भी बिना ज्ञान के उचित ढंग से नहीं किया जा सकता। तब तो वह सर्वथा ही असंभव है। ईरान का ही उदाहरण लीजिए। राज्य क्रांति हो गई, परंतु राज्य संस्थापन और संवर्धन के लिए आवश्यक विधायक पारंगतता क्रांतिकारियों में तो नहीं थी जितनी िकवह आवश्यक थी, अतः अमेरिका से आय-व्यय में निपुण व्यक्ति को लाना पड़ा और अर्थव्यवस्था जैसे अत्यंत महत्तवपूर्ण कार्य में दूसरे के हाथ से पानी पीना पड़ा,