अस्तित्व से जो अनेक कर्तव्य अपने हिस्से में आ गए हैं, उनमें एक महत्तपूर्ण कर्तव्य है-मात्र राजबंदी वर्ग में ही नहीं अपितु भारतीय कारागृहों में भी यथासंभव सुधार कराना।
अतः इस दृष्टि से कारागृह में अंतर्बाह्म सुधार लाने के लिए हमें ऐसे पत्र भेजकर हड़ताल करके, अनुनय या प्रतिकार के साथ आंदोलन करना ही होगा। फिर व्यक्तिगत कष्ट अधिक या कम जैसा भी हो, यथासंभव कष्ट ही लाभ से अधिक हो, फिर भी यह सोचकर कि मैंने अपना कर्तव्य निभाया,
अस्तित्व से जो अनेक कर्तव्य अपने हिस्से में आ गए हैं, उनमें एक महत्तपूर्ण कर्तव्य है-मात्र राजबंदी वर्ग में ही नहीं अपितु भारतीय कारागृहों में भी यथासंभव सुधार कराना।
अतः इस दृष्टि से कारागृह में अंतर्बाह्म सुधार लाने के लिए हमें ऐसे पत्र भेजकर हड़ताल करके, अनुनय या प्रतिकार के साथ आंदोलन करना ही होगा। फिर व्यक्तिगत कष्ट अधिक या कम जैसा भी हो, यथासंभव कष्ट ही लाभ से अधिक हो, फिर भी यह सोचकर कि मैंने अपना कर्तव्य निभाया,