तरह स्वाभाविक है। प्रत्येक चालान आने के पश्चात् उन नवागत बंदियों से अन्य बंदी से अपने-अपने घरबार तथा आप्त स्वकीयों के बारे में पूछताछ करते, पर राजबंदियों का पहला प्रयास यह रहा कि सार्वजनिक खबर क्या है, यह उनसे जानें।
चालान के लोग अशिक्षित और राजनीति का नाम भी न जाननेवाले थे, अर्थात् उनसे सहसा स्वदेश की सार्वजनिक वार्त्ता नहीं मिल पाती थी। केवल एकाध बड़ा राजनीतिक अभियोग, यदि वह उसी समय और उसी अदालत में चल रहा हो, जब वे
तरह स्वाभाविक है। प्रत्येक चालान आने के पश्चात् उन नवागत बंदियों से अन्य बंदी से अपने-अपने घरबार तथा आप्त स्वकीयों के बारे में पूछताछ करते, पर राजबंदियों का पहला प्रयास यह रहा कि सार्वजनिक खबर क्या है, यह उनसे जानें।
चालान के लोग अशिक्षित और राजनीति का नाम भी न जाननेवाले थे, अर्थात् उनसे सहसा स्वदेश की सार्वजनिक वार्त्ता नहीं मिल पाती थी। केवल एकाध बड़ा राजनीतिक अभियोग, यदि वह उसी समय और उसी अदालत में चल रहा हो, जब वे