पकड़े गए थे अथवा हिंदुस्थान में वे जिस बंदीगृह में थे, उसमें यदि वे राजबंदी हों तो उनका अथवा उनके द्वारा भेजे गए समाचार की संक्षिप्त जानकारी, दो बातों से संबंधित जानकारी, तो चालानवाले टूटी-फूटी भाषा में अथवा अस्पष्ट रूप से बताते, उसमें सौभाग्य से कोई शिक्षित बंदी भी कभी-कभार निकल आता था। फिर तो उसकी महत्ता एवं कष्टों के संबंध में क्या कहने! क्यांेकि जहां-जहां वह जाता, वहां-वहां राजबंदी गुपचुप अथवा संदेशों का आदान-प्रदान
पकड़े गए थे अथवा हिंदुस्थान में वे जिस बंदीगृह में थे, उसमें यदि वे राजबंदी हों तो उनका अथवा उनके द्वारा भेजे गए समाचार की संक्षिप्त जानकारी, दो बातों से संबंधित जानकारी, तो चालानवाले टूटी-फूटी भाषा में अथवा अस्पष्ट रूप से बताते, उसमें सौभाग्य से कोई शिक्षित बंदी भी कभी-कभार निकल आता था। फिर तो उसकी महत्ता एवं कष्टों के संबंध में क्या कहने! क्यांेकि जहां-जहां वह जाता, वहां-वहां राजबंदी गुपचुप अथवा संदेशों का आदान-प्रदान