जिससे उन उत्कट देशभक्तों के भावुक मन शोकमग्न हो जाते। इन साधारण बंदियों को भी यदि कोई समाचार स्वयंस्फर्त रूप से संभव होता तो वह किसी बड़े राजनीतिक नेता को पकड़ने की अथवा ‘बादशाह आ रहा है’, ‘दिल्ली ममें बड़ा उत्सव हुआ’ अथवा ‘एक बड़ा साहब मारा गया’ इस तरह दो-चार प्रकाार की प्रक्षोभक घटनाओं की जानकारी देता। क्यांेकि इन घटनाओं की वार्त्ताएं दावानल की तरह अपने आप भड़क उठती तथा भड़काती हुई बाजारों में फैलती। शेष राष्ट्रीय सभा अथवा
जिससे उन उत्कट देशभक्तों के भावुक मन शोकमग्न हो जाते। इन साधारण बंदियों को भी यदि कोई समाचार स्वयंस्फर्त रूप से संभव होता तो वह किसी बड़े राजनीतिक नेता को पकड़ने की अथवा ‘बादशाह आ रहा है’, ‘दिल्ली ममें बड़ा उत्सव हुआ’ अथवा ‘एक बड़ा साहब मारा गया’ इस तरह दो-चार प्रकाार की प्रक्षोभक घटनाओं की जानकारी देता। क्यांेकि इन घटनाओं की वार्त्ताएं दावानल की तरह अपने आप भड़क उठती तथा भड़काती हुई बाजारों में फैलती। शेष राष्ट्रीय सभा अथवा