में ही दंड प्राप्त होकर अंदमान भेजे गए अपने सहअभियुक्तों को कभी एकाध
महत्तवपूर्ण संदेश भेजते, तो कभी परिचित न होते हुए भी अंदमान में जो विख्यात राजबंदी थे, उनके प्रति भक्ति से प्रेरित होकर उन्हें प्रमाण-पत्र भेजने के लिए अन्य कोई साधन उपलब्ध न होने के कारण किसी साधारण पुस्तक का, जो बंदी के पास होती आवरण बनाकर उसमें पत्र छिपाकर भेजते थे।
बिल्ले के पीछे पत्र
कभी-कभी पुस्तक की इस युक्ति से अधिकारी के अच्छी तरह से
में ही दंड प्राप्त होकर अंदमान भेजे गए अपने सहअभियुक्तों को कभी एकाध
महत्तवपूर्ण संदेश भेजते, तो कभी परिचित न होते हुए भी अंदमान में जो विख्यात राजबंदी थे, उनके प्रति भक्ति से प्रेरित होकर उन्हें प्रमाण-पत्र भेजने के लिए अन्य कोई साधन उपलब्ध न होने के कारण किसी साधारण पुस्तक का, जो बंदी के पास होती आवरण बनाकर उसमें पत्र छिपाकर भेजते थे।
बिल्ले के पीछे पत्र
कभी-कभी पुस्तक की इस युक्ति से अधिकारी के अच्छी तरह से