परिचित होने के कारण जो लकड़ी का अथवा लोहे का बिल्ला हर बंदी के गले में लटका होता था, उसके पीछे अक्षर लिखकर पत्र रवाना किए जाते। एक बार मुझे पंजाब के एक महापुरूष के युवा पुत्र ने पंजाब के कारागृह से इस तरह बिल्ले के पीछे लिखा पत्र भेजा था। वह क्रांतिकारी षड्यंत्र के केस में पांच-सात वर्षों का दंड भुगत रहा था। जिस बंदी के गले मेें वह बिल्ला था, पंजाब से प्रस्थान करके अंदमान में मुझसे मिलने तक उसकी पचास बार खूब तलाशी ली गई
परिचित होने के कारण जो लकड़ी का अथवा लोहे का बिल्ला हर बंदी के गले में लटका होता था, उसके पीछे अक्षर लिखकर पत्र रवाना किए जाते। एक बार मुझे पंजाब के एक महापुरूष के युवा पुत्र ने पंजाब के कारागृह से इस तरह बिल्ले के पीछे लिखा पत्र भेजा था। वह क्रांतिकारी षड्यंत्र के केस में पांच-सात वर्षों का दंड भुगत रहा था। जिस बंदी के गले मेें वह बिल्ला था, पंजाब से प्रस्थान करके अंदमान में मुझसे मिलने तक उसकी पचास बार खूब तलाशी ली गई