मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

होगी। परंतु किसी को रत्ती भर भी संदेह नहीं हुआ कि उसके गले में लटके उस बिल्ले के पीछे पत्र लिखा होगा। उस बंदी ने, वह पत्र घिस-घिसकर मिट न जाए इसलिए, वह पदक जतन से रखते हुए अंदमान कारागृह में आते ही मुझ सौंप दिया। मैंने पढ़कर पोंछ दिया और वह बिल्ला वापस लौटाया। इस तरह के उपायों से चालान द्वारा यथासंभव सार्वजतिक समाचार प्राप्त करने का सतत प्रयास चलता रहता था। परंतु एक महीने में आनेवाली सर्वथा अक्षरशत्रु, अनपढ़ बंदियों की


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होगी। परंतु किसी को रत्ती भर भी संदेह नहीं हुआ कि उसके गले में लटके उस बिल्ले के पीछे पत्र लिखा होगा। उस बंदी ने, वह पत्र घिस-घिसकर मिट न जाए इसलिए, वह पदक जतन से रखते हुए अंदमान कारागृह में आते ही मुझ सौंप दिया। मैंने पढ़कर पोंछ दिया और वह बिल्ला वापस लौटाया। इस तरह के उपायों से चालान द्वारा यथासंभव सार्वजतिक समाचार प्राप्त करने का सतत प्रयास चलता रहता था। परंतु एक महीने में आनेवाली सर्वथा अक्षरशत्रु, अनपढ़ बंदियों की


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