इस टोली द्वारा कुछ अधिक महत्तवपूर्ण समाचार प्राप्त होना कठिन ही होने के कारण यह समझने की कि स्वदेश की हालत कैसी है, राजबंदियों की जिज्ञासा अतृप्त ही रहती। उसकी पूर्ति का अन्य उपाय था कारागृह में समाचार-पत्र मंगवाना। अर्थात् यह सबसे अधिक धोखे का एवं कठिन मार्ग था। जिस काल की हम जानकारी दे रहे हैं, उस काल में कारागृह में एक बार चोरी से हाथी आ सकता था और पकड़े जाने पर बिना अनुमति लाने के अपराध में उस बंदी को क्षमा भी कर दिया जाता,
इस टोली द्वारा कुछ अधिक महत्तवपूर्ण समाचार प्राप्त होना कठिन ही होने के कारण यह समझने की कि स्वदेश की हालत कैसी है, राजबंदियों की जिज्ञासा अतृप्त ही रहती। उसकी पूर्ति का अन्य उपाय था कारागृह में समाचार-पत्र मंगवाना। अर्थात् यह सबसे अधिक धोखे का एवं कठिन मार्ग था। जिस काल की हम जानकारी दे रहे हैं, उस काल में कारागृह में एक बार चोरी से हाथी आ सकता था और पकड़े जाने पर बिना अनुमति लाने के अपराध में उस बंदी को क्षमा भी कर दिया जाता,