परंतु वृत्तपत्र और भारतीय वृत्तपत्र की पररची भी भीतर नहीं आ सकती थी, न ही इस अपराध के लिए क्षमा मिलती थी। ऐसी अवस्था में वृत्तपत्र न सही किंतु उसके अंगुली भर के टुकड़े को लाने के लिए, जैसाकि पीछे कहा गया है, कई लोगों ने गाड़ी खींचने के काम के लिए भी मना नहीं किया। कारागृह का सभी कूड़ा-करकट भरकर जो गाड़ियां बाहर जाती, उनके साथ उन्हें खींचते हुए जाना पड़ता था। बाहर गोरे अधिकारियों की कोठियांे से रद्दी,गंदे, पुराने कैसे भी हों,
परंतु वृत्तपत्र और भारतीय वृत्तपत्र की पररची भी भीतर नहीं आ सकती थी, न ही इस अपराध के लिए क्षमा मिलती थी। ऐसी अवस्था में वृत्तपत्र न सही किंतु उसके अंगुली भर के टुकड़े को लाने के लिए, जैसाकि पीछे कहा गया है, कई लोगों ने गाड़ी खींचने के काम के लिए भी मना नहीं किया। कारागृह का सभी कूड़ा-करकट भरकर जो गाड़ियां बाहर जाती, उनके साथ उन्हें खींचते हुए जाना पड़ता था। बाहर गोरे अधिकारियों की कोठियांे से रद्दी,गंदे, पुराने कैसे भी हों,