कपड़े। परंतु उन टुकड़ों को पढ़ना! कहीं हिंदुस्थान का नाम अथवा प्रचलितकालीन लंदन का तार अथवा ‘बंबई टाइम्स’ का टुकड़ा दिखा तो बड़ी आशा से देखते कि कहीं अपने देश का या वर्तमान राजनीति का कोई समाचार तो नहीं है?
परदेसी डाक
यही गाड़ी से आनेवाली परदेसी डाक अर्थात् कारागृह के बाहर से चोरी-छिपे लाए गए समाचार-पत्रांे के ये टुकड़े, कभी-कभी अचानक ताजा समाचार पहुंचा देते थे। कभी ‘लंदन टाइम्स’ के वैलेंटाइन का क्रांतिकारियों के विरूद्व
कपड़े। परंतु उन टुकड़ों को पढ़ना! कहीं हिंदुस्थान का नाम अथवा प्रचलितकालीन लंदन का तार अथवा ‘बंबई टाइम्स’ का टुकड़ा दिखा तो बड़ी आशा से देखते कि कहीं अपने देश का या वर्तमान राजनीति का कोई समाचार तो नहीं है?
परदेसी डाक
यही गाड़ी से आनेवाली परदेसी डाक अर्थात् कारागृह के बाहर से चोरी-छिपे लाए गए समाचार-पत्रांे के ये टुकड़े, कभी-कभी अचानक ताजा समाचार पहुंचा देते थे। कभी ‘लंदन टाइम्स’ के वैलेंटाइन का क्रांतिकारियों के विरूद्व