लेख तो कभी राष्ट्रीय सभा का अध्यक्षीय भाषण। मुझे स्मरण है एक दिन जब इन्हीं बाहरी गाड़ीवानों को तूतीकोरिन के अभियोग की जानकारीवाला एक स्तंभ (ब्वसनउद)मिल गया तब उन्होंने कितनी उत्कंठतापूर्वक वह लाकर हमें दिया, सिर्फ इसी विचार से कि वे समाचार हमें दे सकें और इस तरह वे राजबंदियों की कृतज्ञता प्राप्त कर सकें। उन बेचारों को ऐसा प्रतीत होता कि महीनों गाड़ी खींचने के श्रम का परिहार हो गया। ‘परदेसी डाक’ के समाचार देने की प्रमुख
लेख तो कभी राष्ट्रीय सभा का अध्यक्षीय भाषण। मुझे स्मरण है एक दिन जब इन्हीं बाहरी गाड़ीवानों को तूतीकोरिन के अभियोग की जानकारीवाला एक स्तंभ (ब्वसनउद)मिल गया तब उन्होंने कितनी उत्कंठतापूर्वक वह लाकर हमें दिया, सिर्फ इसी विचार से कि वे समाचार हमें दे सकें और इस तरह वे राजबंदियों की कृतज्ञता प्राप्त कर सकें। उन बेचारों को ऐसा प्रतीत होता कि महीनों गाड़ी खींचने के श्रम का परिहार हो गया। ‘परदेसी डाक’ के समाचार देने की प्रमुख