में जब उनपर आक्रमण की बात कहने लगे तब उन अमंगल विचारों का तीव्र विरोध करके मैंने उन्हें समझाया था कि सच्ची मतभिन्नता के कारण किसी पर भी आक्रमण करना, और वह भी स्वजनों पर, घोर पातक है। यह सचमुच ही अत्याचार होगा और उस प्रस्ताव को मैंने पारित नहीं होने दिया। यदि प्रत्येक हिंदू गोखले जैसा ही देशप्रेमी तथा देशसेवक हो तो भी!!’’ हमारी यह बातचीत बारी ने यथाक्रम लिखकर रखी थी। कालांतर में मैंने एक बार वह टिप्पणी देखी। उसमें बारी
में जब उनपर आक्रमण की बात कहने लगे तब उन अमंगल विचारों का तीव्र विरोध करके मैंने उन्हें समझाया था कि सच्ची मतभिन्नता के कारण किसी पर भी आक्रमण करना, और वह भी स्वजनों पर, घोर पातक है। यह सचमुच ही अत्याचार होगा और उस प्रस्ताव को मैंने पारित नहीं होने दिया। यदि प्रत्येक हिंदू गोखले जैसा ही देशप्रेमी तथा देशसेवक हो तो भी!!’’ हमारी यह बातचीत बारी ने यथाक्रम लिखकर रखी थी। कालांतर में मैंने एक बार वह टिप्पणी देखी। उसमें बारी