में वे सर्वत्र विभिन्न प्रतिद्वंदी नेताओं से भी मिलते रहे। उस समय उन्हें प्रत्येक विपक्षी द्वारा परस्पर की जानेवाली निंदा सुननी पड़ती थी। परंतु तिलक और गोखले ने हरदयाल जैसे होनहार तथा तेजस्वी युवक को देशसेवा के अपने-अपने मार्ग के लिए अनुकूल करने का प्रयास करते हुए भी एक-दूसरे के प्रति आदर भाव ही प्रदर्शित किया। तिलकजी ने कहा, ‘एक बार गोखले से भी मिल लीजिए’ और गोखले ने भी कहा, ‘आप तिलकजी के यहां ठहरे हैं? यह अच्छा ही किया। मैं जानता हूं,
में वे सर्वत्र विभिन्न प्रतिद्वंदी नेताओं से भी मिलते रहे। उस समय उन्हें प्रत्येक विपक्षी द्वारा परस्पर की जानेवाली निंदा सुननी पड़ती थी। परंतु तिलक और गोखले ने हरदयाल जैसे होनहार तथा तेजस्वी युवक को देशसेवा के अपने-अपने मार्ग के लिए अनुकूल करने का प्रयास करते हुए भी एक-दूसरे के प्रति आदर भाव ही प्रदर्शित किया। तिलकजी ने कहा, ‘एक बार गोखले से भी मिल लीजिए’ और गोखले ने भी कहा, ‘आप तिलकजी के यहां ठहरे हैं? यह अच्छा ही किया। मैं जानता हूं,