आत्मा में जो छटपटाहट होती है और इस चिंता से कि मुझे मिलने से पहले ही कहीं भिक्षा खत्म तो नहीं हो जाएगी, उनके प्राण जैसे उड़ने लगते हैं, ठीक वैसी ही अवस्था ‘जुबली होगी’ शब्दों के साथ-साथ ही मुक्ति होगी, अथवा कम-से-कम छूट मिलेगी, जैसी गप से बंदीवानों की होती है। यहां-वहां हर रोज यह बात फैल जाती है और हर किसी के मुख प्रफुल्लित दिखाई देने लगते हैं। प्रत्येक बंदी जानता है कि इस उत्सव के समय जो नाम जाएंगे उनमें उसका क्रमांक,
आत्मा में जो छटपटाहट होती है और इस चिंता से कि मुझे मिलने से पहले ही कहीं भिक्षा खत्म तो नहीं हो जाएगी, उनके प्राण जैसे उड़ने लगते हैं, ठीक वैसी ही अवस्था ‘जुबली होगी’ शब्दों के साथ-साथ ही मुक्ति होगी, अथवा कम-से-कम छूट मिलेगी, जैसी गप से बंदीवानों की होती है। यहां-वहां हर रोज यह बात फैल जाती है और हर किसी के मुख प्रफुल्लित दिखाई देने लगते हैं। प्रत्येक बंदी जानता है कि इस उत्सव के समय जो नाम जाएंगे उनमें उसका क्रमांक,