उसका नाम होना न होना अपने बंदीवासीय आचरण पर अवलंबित है। यह प्रत्येक को ज्ञात होने से हर बंदी अधिकारियों की चापलूसी करने लगता है। अत्यंत कष्टप्रद काम भी बिना आपत्तिा के चुपचाप होने लगते हैं। अधिकारी भी काम बढ़ाकर इस अवसर का पूरा-पूरा लाभ उठाते हैं। बंदी के आगे प्रलोभन जगमगाता है, अब थोड़े दि नही तो बाकी हैं, जुबली आ रही है, तुम्हारा नाम हम सरकार को ऊपर भेजने वाले हैं। आशादायी वातावरण में ‘जुबली उत्सव आ रहा है’ जैसे सच-झूठ
उसका नाम होना न होना अपने बंदीवासीय आचरण पर अवलंबित है। यह प्रत्येक को ज्ञात होने से हर बंदी अधिकारियों की चापलूसी करने लगता है। अत्यंत कष्टप्रद काम भी बिना आपत्तिा के चुपचाप होने लगते हैं। अधिकारी भी काम बढ़ाकर इस अवसर का पूरा-पूरा लाभ उठाते हैं। बंदी के आगे प्रलोभन जगमगाता है, अब थोड़े दि नही तो बाकी हैं, जुबली आ रही है, तुम्हारा नाम हम सरकार को ऊपर भेजने वाले हैं। आशादायी वातावरण में ‘जुबली उत्सव आ रहा है’ जैसे सच-झूठ