उठने की देरी है कि सारे बंदीजनों का वह महीना-डेढ़ महीना बडे़ आनंद से व्यतीत होनेवाला है। यह बात पक्की है कि अंदमान के इन बंदियों को, जिन्हें
आजन्म कालेपानी का दंड हुआ और कुछ असंभवनीय घटना घटित होने के सिवाय घर जाने की, जीवन में फिर से स्वतंत्रता का सुख भोगने की कुछ भी आशा शेष न हो, किसी असंभवनीय घटना की ही आस लगी रहती है।
उत्सव
उत्सव होनेवाला है, असंभाव्य घटना का ऐसा कोई भी समाचार आते ही उनकी आशा स्वाभाविक ही उस
उठने की देरी है कि सारे बंदीजनों का वह महीना-डेढ़ महीना बडे़ आनंद से व्यतीत होनेवाला है। यह बात पक्की है कि अंदमान के इन बंदियों को, जिन्हें
आजन्म कालेपानी का दंड हुआ और कुछ असंभवनीय घटना घटित होने के सिवाय घर जाने की, जीवन में फिर से स्वतंत्रता का सुख भोगने की कुछ भी आशा शेष न हो, किसी असंभवनीय घटना की ही आस लगी रहती है।
उत्सव
उत्सव होनेवाला है, असंभाव्य घटना का ऐसा कोई भी समाचार आते ही उनकी आशा स्वाभाविक ही उस