भी वैसे समाचार उड़ाए जाते ही लोग पूर्ववत् उनपर विश्वास करते और किसी ने भी निराशा के सागर में डूबते हुए उन लोगों को बताया कि जिसमें तुम भी लटकना चाहते हो, वह इस उत्सव की गप भी मात्र कल्पनाजन्य तिनका है, तो इस तरह उनकी आशा भंग करने से उन्हें क्रोध आ जाता।
यद्यपि हमने स्वयं इस बात का अनुभव किया है कि घोर संकट से मुक्ति मिलना असंभव है, फिर भी वही निराशा की बात किसी दूसरे द्वारा बताए जाने से अथवा स्वयं के अनुभव करने से की
भी वैसे समाचार उड़ाए जाते ही लोग पूर्ववत् उनपर विश्वास करते और किसी ने भी निराशा के सागर में डूबते हुए उन लोगों को बताया कि जिसमें तुम भी लटकना चाहते हो, वह इस उत्सव की गप भी मात्र कल्पनाजन्य तिनका है, तो इस तरह उनकी आशा भंग करने से उन्हें क्रोध आ जाता।
यद्यपि हमने स्वयं इस बात का अनुभव किया है कि घोर संकट से मुक्ति मिलना असंभव है, फिर भी वही निराशा की बात किसी दूसरे द्वारा बताए जाने से अथवा स्वयं के अनुभव करने से की