का आलिगंन करने के लिए अपने मन को तैयार कर रहे थे। परंतु एक बार एक अधिकारी, जो हमसे सहानुभूति रखते थे, डोंगरी के कारागार में मिलने आए और उन्होंने कहा कि अबकी बार आपको फांसी ही होगी, तब मन-ही-मन हम उस सज्जन पर क्रोधित हो ही गए। हमें आज भी स्मरण है कि विवेक की सहायता से हमें उस क्रोध पर किस तरह नियंत्रण करना पड़ा।
पूर्व प्रसंग की इन्हीं स्मृतियों के कारण कठोर तथा निराशाप्रवण बने हमारे मन पर इस समाचार कि कि राज्यारोहण के
का आलिगंन करने के लिए अपने मन को तैयार कर रहे थे। परंतु एक बार एक अधिकारी, जो हमसे सहानुभूति रखते थे, डोंगरी के कारागार में मिलने आए और उन्होंने कहा कि अबकी बार आपको फांसी ही होगी, तब मन-ही-मन हम उस सज्जन पर क्रोधित हो ही गए। हमें आज भी स्मरण है कि विवेक की सहायता से हमें उस क्रोध पर किस तरह नियंत्रण करना पड़ा।
पूर्व प्रसंग की इन्हीं स्मृतियों के कारण कठोर तथा निराशाप्रवण बने हमारे मन पर इस समाचार कि कि राज्यारोहण के