उपलक्ष्य में संपन्न उत्सव में हमें संपूर्ण मुक्ति मिलेगी, कुछ विशेष नहीं हुआ। परंतु अन्य राजबंदियों का उल्लास ढाढें मारने
लगा था। प्रत्येक राजबंदी मन के लड्डू खाने लगा कि अब वह घर जाएगा, जाने के पश्चात् क्या करेगा। इतना ही नहीं, रेल के किस मार्ग से वह कहां जाएगा, वह यहां तक अनुमान करने लगा। उसमें भी कइयों को आजीवन कालापानी, तो कइयों को 14, 10, 7 वर्षों का भारी-भारी दंड दिया गया था और उस दंड के लिए सरकार ने लाखों रूपए खर्च किए थे,
उपलक्ष्य में संपन्न उत्सव में हमें संपूर्ण मुक्ति मिलेगी, कुछ विशेष नहीं हुआ। परंतु अन्य राजबंदियों का उल्लास ढाढें मारने
लगा था। प्रत्येक राजबंदी मन के लड्डू खाने लगा कि अब वह घर जाएगा, जाने के पश्चात् क्या करेगा। इतना ही नहीं, रेल के किस मार्ग से वह कहां जाएगा, वह यहां तक अनुमान करने लगा। उसमें भी कइयों को आजीवन कालापानी, तो कइयों को 14, 10, 7 वर्षों का भारी-भारी दंड दिया गया था और उस दंड के लिए सरकार ने लाखों रूपए खर्च किए थे,