मुक्ति मिलेगी न?’’ मेरे नकारात्मक सिर हिलाते ही उनमें से एक उत्साही युवा मित्र ने, जो मुझसे अत्यंत निश्छल सहानुभूति रखता था, मेरे गले में झूलती बंदीवान की लोहे की उस हंसुली को, जिसमंे बंदी का क्रमांक तथा दंड का लकड़ी का तमगा लटकता है, पकड़ लिया और कहने लगा, ‘‘टूटेगा, कल यह बिल्ला आपके गले से टूटेगा।’’ मैंने कहा, ‘‘आप में कोई भी मुक्त हो जाएगा, पर मैं नहीं।
तथापि हममें से एक भी मुक्त हो जाए तो हमें उतना ही हर्ष होगा।
मुक्ति मिलेगी न?’’ मेरे नकारात्मक सिर हिलाते ही उनमें से एक उत्साही युवा मित्र ने, जो मुझसे अत्यंत निश्छल सहानुभूति रखता था, मेरे गले में झूलती बंदीवान की लोहे की उस हंसुली को, जिसमंे बंदी का क्रमांक तथा दंड का लकड़ी का तमगा लटकता है, पकड़ लिया और कहने लगा, ‘‘टूटेगा, कल यह बिल्ला आपके गले से टूटेगा।’’ मैंने कहा, ‘‘आप में कोई भी मुक्त हो जाएगा, पर मैं नहीं।
तथापि हममें से एक भी मुक्त हो जाए तो हमें उतना ही हर्ष होगा।