मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

रहा जब तक उसकी आधी चोटी उखड़कर हाथ मंे नहीं आ गई। बंदी का चीखना-चिल्लाना सुनकर वह ‘बड़ा जमादार’ अर्थात् मिर्जा खान आ गया और अपने ही गुट के एक पेटी अफसर को देखकर उलटे उस बंदी पर ही नरोटी रखने के अपराध में अभियोग लगाने ले गया।

मैं यह सारा तमाशा देख रहा था। जाते-जाते उसे संकेत से सूचित किया, मेरी गवाही दे दो। उसी के अनुसार गवाह के रूप में मेरा नाम बताया जाने पर मुझे बुलाया गया। मैंने जाते ही बताया कि यह बलूची पेटी अफसर दही मांग रहा था,


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रहा जब तक उसकी आधी चोटी उखड़कर हाथ मंे नहीं आ गई। बंदी का चीखना-चिल्लाना सुनकर वह ‘बड़ा जमादार’ अर्थात् मिर्जा खान आ गया और अपने ही गुट के एक पेटी अफसर को देखकर उलटे उस बंदी पर ही नरोटी रखने के अपराध में अभियोग लगाने ले गया।

मैं यह सारा तमाशा देख रहा था। जाते-जाते उसे संकेत से सूचित किया, मेरी गवाही दे दो। उसी के अनुसार गवाह के रूप में मेरा नाम बताया जाने पर मुझे बुलाया गया। मैंने जाते ही बताया कि यह बलूची पेटी अफसर दही मांग रहा था,


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