से लाल-पीला हो गया और अन्य पेटी अफसरों पर भी अपनी धाक जमपने के लिए उसने उस बलूची पेटी अफसर को तोड़ डालकर अर्थात् उसका पट्टा छीनकर उसे पुनः कामगार बंदियों में भेजकर कठोर परिश्रम के काम में लगा दिया। इस तरह काफर की उखाड़ी गई चोटी से मियांजी की दाढ़ी भी उखाड़ी गई।
इस प्रकार ‘छोट बारी’ अर्थात् जमादार मिर्जा खान के विरूद्व उसके अन्याय से हिंदू बंदियों को बचाने के प्रयास में वह कई बार हमें भी फांसता और इसके लिए हमें
कितना अत्याचार सहना पड़ता,
से लाल-पीला हो गया और अन्य पेटी अफसरों पर भी अपनी धाक जमपने के लिए उसने उस बलूची पेटी अफसर को तोड़ डालकर अर्थात् उसका पट्टा छीनकर उसे पुनः कामगार बंदियों में भेजकर कठोर परिश्रम के काम में लगा दिया। इस तरह काफर की उखाड़ी गई चोटी से मियांजी की दाढ़ी भी उखाड़ी गई।
इस प्रकार ‘छोट बारी’ अर्थात् जमादार मिर्जा खान के विरूद्व उसके अन्याय से हिंदू बंदियों को बचाने के प्रयास में वह कई बार हमें भी फांसता और इसके लिए हमें
कितना अत्याचार सहना पड़ता,