इसका विवरण आगे चलकर थोड़ा-बहुत आएगा। उसके विरूद्व साधारण बंदियों में चुगलियां करने की किसी की हिम्मत नहीं होती। राजबंदी ही कुछ साहस दिखाते, तो दिखाते। उनमें भी दस-पांच लोग ही अन्य हिंदुओं का पक्ष लेकर मिर्जा के विरूद्व अभियोग लगाने का साहस जुटाते। उनमें से कुछ ठोस उदारहरण आगे दिए जाएंगे। परंतु यहां यह एक बात इसलिए दी कि बंदियों को भोजन मिले। इसके लिए जो नियम थे, वे कुछ अधिक आक्षेपी नहीं थे। फिर भी बंदियों के मुख मंे पड़ने के पूर्व उस भोजन की जो चोरियां होती,
इसका विवरण आगे चलकर थोड़ा-बहुत आएगा। उसके विरूद्व साधारण बंदियों में चुगलियां करने की किसी की हिम्मत नहीं होती। राजबंदी ही कुछ साहस दिखाते, तो दिखाते। उनमें भी दस-पांच लोग ही अन्य हिंदुओं का पक्ष लेकर मिर्जा के विरूद्व अभियोग लगाने का साहस जुटाते। उनमें से कुछ ठोस उदारहरण आगे दिए जाएंगे। परंतु यहां यह एक बात इसलिए दी कि बंदियों को भोजन मिले। इसके लिए जो नियम थे, वे कुछ अधिक आक्षेपी नहीं थे। फिर भी बंदियों के मुख मंे पड़ने के पूर्व उस भोजन की जो चोरियां होती,