तैयार किया जाता। रसोइए इतने गंदे थे और सरकारी नियमानुसार सावधानी न बरतने के कारण कभी-कभी वे भयंकर संक्रामक, गुप्त रोग से पीड़ित भी होते थे। पसीने से तर-बतर उनके दुर्गंधयुक्त वस्त्र। कड़ी धूप में भोजन परोसते समय हमारी आखों के सामने माथे का पसीना दाल के बड़े-बडे़ डोंगों मंे, डेगचियों में टपकता, हम देखते और वही दाल हमारे लिए चटकारे भर-भरके सुड़कना अनिवार्य होता। भला इसमें उस रसोइए का क्या दोष? उस परोसिए का क्या अपराध? चिलचिलाते
तैयार किया जाता। रसोइए इतने गंदे थे और सरकारी नियमानुसार सावधानी न बरतने के कारण कभी-कभी वे भयंकर संक्रामक, गुप्त रोग से पीड़ित भी होते थे। पसीने से तर-बतर उनके दुर्गंधयुक्त वस्त्र। कड़ी धूप में भोजन परोसते समय हमारी आखों के सामने माथे का पसीना दाल के बड़े-बडे़ डोंगों मंे, डेगचियों में टपकता, हम देखते और वही दाल हमारे लिए चटकारे भर-भरके सुड़कना अनिवार्य होता। भला इसमें उस रसोइए का क्या दोष? उस परोसिए का क्या अपराध? चिलचिलाते