थी कि जो बंदी बारी के अत्याचारों से भयभीत होकर इस आंदोलन को पेटू कहकर अपनी कायरता छिपाने का प्रयास करते, उन्हीं राजबंदियों
के लिए जब बारी कुछ अंश में स्वतंत्र रूप से भोजन बनवाने लगा तब राजबंदी होने के नाते उन्हें अपना अधिकार जताने में रत्ती भर भी संकोच अथवा पेटूपन प्रतीत नहीं हुआ।
राजबंदियों को थोड़ा-बहुत अच्छा भोजन मिलने का लाभ हो गया, तथापि उस उपलब्धि से वे हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे। समय-समय पर अन्य बंदियों को आगे
थी कि जो बंदी बारी के अत्याचारों से भयभीत होकर इस आंदोलन को पेटू कहकर अपनी कायरता छिपाने का प्रयास करते, उन्हीं राजबंदियों
के लिए जब बारी कुछ अंश में स्वतंत्र रूप से भोजन बनवाने लगा तब राजबंदी होने के नाते उन्हें अपना अधिकार जताने में रत्ती भर भी संकोच अथवा पेटूपन प्रतीत नहीं हुआ।
राजबंदियों को थोड़ा-बहुत अच्छा भोजन मिलने का लाभ हो गया, तथापि उस उपलब्धि से वे हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे। समय-समय पर अन्य बंदियों को आगे