मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

’ यह अकड़बाज, रोबीली घन गर्जना पिलपिली होते-होते एकदम मंद पड़ गई।

बंदीगृह के अन्न तथा उसके सेवन के सुधारों के प्रयास का वृत्तांत प्रथम पांच छह वर्षो का अर्थात् साधारणतः सन् 1914-15 तक का है। आगे देख सकेंगे कि सके पश्चात् राजबंदियों और उनके प्रयास से मेरे भोजन में परिवर्तन हो पाया।


प्रकरण-16

आत्महत्या, धर-पकड़ एवं

दूसरी-तीसरी हड़ताल

मेरे प्रथम वर्ष के छह महीनों में मुझे सर्वथा कठोरतापूर्वक कोठरी में बंद रखा गया था।


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’ यह अकड़बाज, रोबीली घन गर्जना पिलपिली होते-होते एकदम मंद पड़ गई।

बंदीगृह के अन्न तथा उसके सेवन के सुधारों के प्रयास का वृत्तांत प्रथम पांच छह वर्षो का अर्थात् साधारणतः सन् 1914-15 तक का है। आगे देख सकेंगे कि सके पश्चात् राजबंदियों और उनके प्रयास से मेरे भोजन में परिवर्तन हो पाया।


प्रकरण-16

आत्महत्या, धर-पकड़ एवं

दूसरी-तीसरी हड़ताल

मेरे प्रथम वर्ष के छह महीनों में मुझे सर्वथा कठोरतापूर्वक कोठरी में बंद रखा गया था।


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