उद्वार करके- धमकाया, ‘तुम पर बंेत बरसाए जाएंगे।’ वहां से लौटकर लोहे की थाली में भात खाने बैठा। दुःख और अपमान का ज्वालामुखी पेट में भड़क उठा, कंठ अवरूद्व हो गया, ग्रास गले के नीचे नहीं उतर रहा था। इतने में एक हिंदू पेटी अफसर ने द्रवित होकर परसैए से गुपचुप कहा, ‘अरे, उन्हें थोड़ा चावल और दो। बाबू लोग कष्ट में हैं।’
यह सुनते ही एकदम चीखकर रूलाई फूट पड़ी और अपने ही हाथों से अपना ही गला दबाते हुए मैं उसे रोकने लगा। ऐसी दशा
उद्वार करके- धमकाया, ‘तुम पर बंेत बरसाए जाएंगे।’ वहां से लौटकर लोहे की थाली में भात खाने बैठा। दुःख और अपमान का ज्वालामुखी पेट में भड़क उठा, कंठ अवरूद्व हो गया, ग्रास गले के नीचे नहीं उतर रहा था। इतने में एक हिंदू पेटी अफसर ने द्रवित होकर परसैए से गुपचुप कहा, ‘अरे, उन्हें थोड़ा चावल और दो। बाबू लोग कष्ट में हैं।’
यह सुनते ही एकदम चीखकर रूलाई फूट पड़ी और अपने ही हाथों से अपना ही गला दबाते हुए मैं उसे रोकने लगा। ऐसी दशा