मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

में किसी ने पीठ पर लाठी मारी होती तो भी उसे सह लेता, परंतु सहानुभूति के ये बोल सहना भारी पड़ रहा था।’

अपमानित जीवन से मर जाना अच्छा

एक युवक को, जिनका नाम इंदुभूषण था, माणिकतल्ला षड्यंत्र में दस वर्षों का दंड हुआ था। बंदीगृह में उसे भी कोल्हू की और अन्य कष्टों का स्वाद चखना पड़ा। जो लोग बाहर निकले उनमें वह भी था। परंतु बाहर जाकर देखा तो भीतर के कार्य से कुछ अधिक हलकी-फुलकी और कुछ अधिक सुविधांए प्राप्त होना तो दूर, उसे कठिन काम ही दिया गया,


808 of 2228

में किसी ने पीठ पर लाठी मारी होती तो भी उसे सह लेता, परंतु सहानुभूति के ये बोल सहना भारी पड़ रहा था।’

अपमानित जीवन से मर जाना अच्छा

एक युवक को, जिनका नाम इंदुभूषण था, माणिकतल्ला षड्यंत्र में दस वर्षों का दंड हुआ था। बंदीगृह में उसे भी कोल्हू की और अन्य कष्टों का स्वाद चखना पड़ा। जो लोग बाहर निकले उनमें वह भी था। परंतु बाहर जाकर देखा तो भीतर के कार्य से कुछ अधिक हलकी-फुलकी और कुछ अधिक सुविधांए प्राप्त होना तो दूर, उसे कठिन काम ही दिया गया,


808 of 2228