मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

में बंद होकर रहना पड़ता। इंदुभूषण इस कष्ट से ऊब गया। अंत में निरूपाय होकर उसने बंदीवास स्वीकार किया। दंडा-बेड़ी, हथकड़ियां अपनाई, परंतु इन कष्टों को टालने के लिए काम करने से स्पष्ट ठनकार किया। उसे दंड दिया गया। पुनः कारागृह में ठूंसा गया। आते ह बारी ने कहा, ‘‘तुम वापस क्यांे लौट आए? तुम क्या समझते हो, बाहर काम करने से मुंह मोड़ने पर कारागार की कोठरी में बंद होकर सुखपूर्वक रह सकोगे? बिलकुल नहीं। जाओ, इसे कोल्हू में ले जाओ।’’


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में बंद होकर रहना पड़ता। इंदुभूषण इस कष्ट से ऊब गया। अंत में निरूपाय होकर उसने बंदीवास स्वीकार किया। दंडा-बेड़ी, हथकड़ियां अपनाई, परंतु इन कष्टों को टालने के लिए काम करने से स्पष्ट ठनकार किया। उसे दंड दिया गया। पुनः कारागृह में ठूंसा गया। आते ह बारी ने कहा, ‘‘तुम वापस क्यांे लौट आए? तुम क्या समझते हो, बाहर काम करने से मुंह मोड़ने पर कारागार की कोठरी में बंद होकर सुखपूर्वक रह सकोगे? बिलकुल नहीं। जाओ, इसे कोल्हू में ले जाओ।’’


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