बस फिर क्या था! उसे तुरंत कोल्हू में जोता गया। वह झंुझलाया। हमने उसे काफी धीरज बंधाया, ‘‘तुम्हें तो केवल पांच-दस वर्षों का दंड हुआ। हमें आजीवन कारावास है। अतः हमारी ओर देखकर मन को संभालो।’’ शाम को तेल ले जाते समय मैंने उससे गुप्त भेंट की। बस, दो-चार शब्द ही बोल पाया। उसने कहा, वैसे वह नित्य ही कहता, ‘‘छिः! इस नीच मानखंडना में जीवित रहने से अच्छा है मृत्यु को गले लगाना, ‘‘मैंने पुनः उसे धीरज बंधाया और कहा,‘‘स्वदेश-स्वार्थ
बस फिर क्या था! उसे तुरंत कोल्हू में जोता गया। वह झंुझलाया। हमने उसे काफी धीरज बंधाया, ‘‘तुम्हें तो केवल पांच-दस वर्षों का दंड हुआ। हमें आजीवन कारावास है। अतः हमारी ओर देखकर मन को संभालो।’’ शाम को तेल ले जाते समय मैंने उससे गुप्त भेंट की। बस, दो-चार शब्द ही बोल पाया। उसने कहा, वैसे वह नित्य ही कहता, ‘‘छिः! इस नीच मानखंडना में जीवित रहने से अच्छा है मृत्यु को गले लगाना, ‘‘मैंने पुनः उसे धीरज बंधाया और कहा,‘‘स्वदेश-स्वार्थ