अप्रत्यक्ष प्रमाण आपके विधान का समर्थक होते हुए भी आपने इसे आगे क्यों नहीं किया? अब भी आप मुझे वह चिट्ठी दिखाइए। दो-तीन दिन पहले स्वयं इंदु से मेरा प्रत्यक्ष संभाषण और ‘हम तो ऐसी कष्टप्रद अवस्था में इस बरस जीना नहीं चाहते, ‘यह उसके अन्य लोगों के संकट के समय कहे उद्गार हैं और हमारे जानते हुए भी आप कहते हैं कि वह अचानक सिर फिरने से मर गया। अच्छा यह माना कि अचानक सिर फिरने से मर गया, तथापि यह प्रश्न तो शेष रहता ही है कि उसका दिमाग इतना निर्बल,
अप्रत्यक्ष प्रमाण आपके विधान का समर्थक होते हुए भी आपने इसे आगे क्यों नहीं किया? अब भी आप मुझे वह चिट्ठी दिखाइए। दो-तीन दिन पहले स्वयं इंदु से मेरा प्रत्यक्ष संभाषण और ‘हम तो ऐसी कष्टप्रद अवस्था में इस बरस जीना नहीं चाहते, ‘यह उसके अन्य लोगों के संकट के समय कहे उद्गार हैं और हमारे जानते हुए भी आप कहते हैं कि वह अचानक सिर फिरने से मर गया। अच्छा यह माना कि अचानक सिर फिरने से मर गया, तथापि यह प्रश्न तो शेष रहता ही है कि उसका दिमाग इतना निर्बल,