थोडे़ ही दिनों के पश्चात् मेरे द्वारा भोग न चढ़ाने के कारण तंडेल महाशय आपे से बाहर होने लगे। अन्य बंदियों का दूध उसे मिलता था, अतः उसने मेरी उस काम पर बदली की जहां दूध नहीं भरे दो डिब्बों की बहंगी या कांवर पर पहुंचाना। मन-मन का बोझ और पहाड़ी की चढ़ाई। प्रतिपल पांव फिसलकर नीचे गिरकर मरने का भय, पानी भर-भरकर थक जाने पर भी कई दिनों तक जैसे-तैसे निभाया परंतु अब स्वास्थ्य क लिए असहनीय हो गया। अतः काम नकारने के अतिरिक्त अन्य कोई
थोडे़ ही दिनों के पश्चात् मेरे द्वारा भोग न चढ़ाने के कारण तंडेल महाशय आपे से बाहर होने लगे। अन्य बंदियों का दूध उसे मिलता था, अतः उसने मेरी उस काम पर बदली की जहां दूध नहीं भरे दो डिब्बों की बहंगी या कांवर पर पहुंचाना। मन-मन का बोझ और पहाड़ी की चढ़ाई। प्रतिपल पांव फिसलकर नीचे गिरकर मरने का भय, पानी भर-भरकर थक जाने पर भी कई दिनों तक जैसे-तैसे निभाया परंतु अब स्वास्थ्य क लिए असहनीय हो गया। अतः काम नकारने के अतिरिक्त अन्य कोई