अपनी आत्मा पर मैं स्वयं क्योंकर उन्हें अधिकार जताने दूं? मैंने ठान लिया, मैं स्वयं अपनी देह को दास बनाने का कार्य नहीं करूंगां मुझे तीन मास का अति कठोर परिश्रम का दंड दे दिया गया। पुनः कारागृह में डाला गया, पुनः वही कष्टप्रद कारावास। द्वार पर ही खड़ा है। यहां का अनुशासन तोड़ा, कामचोरी की तो कोड़े बरसाऊंगा। जानते हो, बेंत कैसे होते हैं-ऐसे कि एक-एक फटकार के साथ एक-एक इंच गहरे तुम्हारे मांस में धंसकर चुभेंगे। तीस बंेत मारूंगा।’’ मैंने उत्तर दिया,
अपनी आत्मा पर मैं स्वयं क्योंकर उन्हें अधिकार जताने दूं? मैंने ठान लिया, मैं स्वयं अपनी देह को दास बनाने का कार्य नहीं करूंगां मुझे तीन मास का अति कठोर परिश्रम का दंड दे दिया गया। पुनः कारागृह में डाला गया, पुनः वही कष्टप्रद कारावास। द्वार पर ही खड़ा है। यहां का अनुशासन तोड़ा, कामचोरी की तो कोड़े बरसाऊंगा। जानते हो, बेंत कैसे होते हैं-ऐसे कि एक-एक फटकार के साथ एक-एक इंच गहरे तुम्हारे मांस में धंसकर चुभेंगे। तीस बंेत मारूंगा।’’ मैंने उत्तर दिया,