मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

कुछ होते हुए भ्ज्ञी वह हथकड़ी में ही था। हम यूं ही कोठरी के द्वार पर खड़े रहे थे, इतने में अचानक कर्णकटु चीखें और पकड़-धकड़ का कोलाहल सुनाई दिया। पेट में गड्ढा सा पड़ गया। इस तरह के कोलाहल और चीख-पुकार अंदमान के उस कारागार में एक साधारण घटना थी, अतः उनका भयप्रद अर्थ भी साधारणतः सभी को ज्ञात था। किसी बंदी को ‘ठीक करने’ के लिए उसपर अचानक पांच-दस वाॅर्डर, पेटी अफसर आक्रमण करते हुए उसे कोठरी में बंद करके उसकी रूई


की तरह धुनाई


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कुछ होते हुए भ्ज्ञी वह हथकड़ी में ही था। हम यूं ही कोठरी के द्वार पर खड़े रहे थे, इतने में अचानक कर्णकटु चीखें और पकड़-धकड़ का कोलाहल सुनाई दिया। पेट में गड्ढा सा पड़ गया। इस तरह के कोलाहल और चीख-पुकार अंदमान के उस कारागार में एक साधारण घटना थी, अतः उनका भयप्रद अर्थ भी साधारणतः सभी को ज्ञात था। किसी बंदी को ‘ठीक करने’ के लिए उसपर अचानक पांच-दस वाॅर्डर, पेटी अफसर आक्रमण करते हुए उसे कोठरी में बंद करके उसकी रूई


की तरह धुनाई


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