करते और उसके पश्चात् सभी भाग जाते और तब तक नहीं मिलते जब तक गवाही का चक्कर प्रारंभ नहीं होता-इस प्रकार की चीखों का यही अर्थ होता था। अतः हमारे होश इसलिए उड़ने लगे कि कहीं आज किसी राजबंदी को तो ‘ठीक’ नहीं किया जा रहा है?
बारी और पेटी अफसर कई बार सरेआम कहते, एकाध बार राजबंदियों में से एक-दो झगड़ालुओं को ‘ठीक कर दिया’ तो इनके तमाम आंदोलन और अकड़ निकल जाएगी। वाॅर्डर से पूछा, ‘‘चीखें आ रही हैं, क्या मामला है?’’ उसने कहा, ‘‘मैं
करते और उसके पश्चात् सभी भाग जाते और तब तक नहीं मिलते जब तक गवाही का चक्कर प्रारंभ नहीं होता-इस प्रकार की चीखों का यही अर्थ होता था। अतः हमारे होश इसलिए उड़ने लगे कि कहीं आज किसी राजबंदी को तो ‘ठीक’ नहीं किया जा रहा है?
बारी और पेटी अफसर कई बार सरेआम कहते, एकाध बार राजबंदियों में से एक-दो झगड़ालुओं को ‘ठीक कर दिया’ तो इनके तमाम आंदोलन और अकड़ निकल जाएगी। वाॅर्डर से पूछा, ‘‘चीखें आ रही हैं, क्या मामला है?’’ उसने कहा, ‘‘मैं