नहीं जानता।’’ ह्नदय को चीरती हुई पागल चीखें कानों से अविरत रूप से टकराने लगी। पाचंवे क्रमांक के कक्ष से पांच-दस लोग किसी को घसीटकर, गिराते हुए रूग्णालय में उठाकर ले जा रहे हैं, वह चीख रहा है-धड़ाम से गिर रहा है, चिल्ल-पों मची है। इतने में एक वाॅर्डर भागा-भागा आकर फुसफुसाया-उल्लासकर पागल हो गया!’
हां, अंगार बरसाती धूप में तपकर उसके शरीर का ज्वर बढ़ते-बढ़ते 107॰ जा पहंुचा, लेकिन फिर भी उसे हथकड़ियों में जकड़कर खड़ा किया गया था। उसके ज्ञानतंतु,
नहीं जानता।’’ ह्नदय को चीरती हुई पागल चीखें कानों से अविरत रूप से टकराने लगी। पाचंवे क्रमांक के कक्ष से पांच-दस लोग किसी को घसीटकर, गिराते हुए रूग्णालय में उठाकर ले जा रहे हैं, वह चीख रहा है-धड़ाम से गिर रहा है, चिल्ल-पों मची है। इतने में एक वाॅर्डर भागा-भागा आकर फुसफुसाया-उल्लासकर पागल हो गया!’
हां, अंगार बरसाती धूप में तपकर उसके शरीर का ज्वर बढ़ते-बढ़ते 107॰ जा पहंुचा, लेकिन फिर भी उसे हथकड़ियों में जकड़कर खड़ा किया गया था। उसके ज्ञानतंतु,