जो पहले ही वर्षों से कारावासीय यंत्रनाओं का शिकार होकर भ्रामक दृश्य देखने की हद तक क्षीण बन चुके थे, निर्बुद्व हो गए और उसे उन्माद हो गया। शरीर में भयंकर ऐंठन होने लगी और वह दस लोगों से भी संभाला नहीं जा रहा था। जैसे-तैसे डाॅक्टर ने उसे रूग्णालय में ले जाकर पटक दिया। उल्लासकर अत्यंत हंसोड़ स्वभाव का व्यक्ति था। फांसी का फेसला होने पर भी वह नित्य हंसी-ठिठोली करता रहता। उसका वह व्यंग्य-विनोद उत्मादावस्था में भी उसका साथ नहीं छोड़ रहा था। रात भर चीखते-चिल्लाते,
जो पहले ही वर्षों से कारावासीय यंत्रनाओं का शिकार होकर भ्रामक दृश्य देखने की हद तक क्षीण बन चुके थे, निर्बुद्व हो गए और उसे उन्माद हो गया। शरीर में भयंकर ऐंठन होने लगी और वह दस लोगों से भी संभाला नहीं जा रहा था। जैसे-तैसे डाॅक्टर ने उसे रूग्णालय में ले जाकर पटक दिया। उल्लासकर अत्यंत हंसोड़ स्वभाव का व्यक्ति था। फांसी का फेसला होने पर भी वह नित्य हंसी-ठिठोली करता रहता। उसका वह व्यंग्य-विनोद उत्मादावस्था में भी उसका साथ नहीं छोड़ रहा था। रात भर चीखते-चिल्लाते,