धमनी, तंतु को क्रूरता से खींच रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मेरे शरीर में भूत-प्रेत का प्रवेश हो रहा है और यातनाओं के आवेग में मैं उन अश्लील शब्दों का उच्चारण करते हुए चिल्लाता रहा जो जीवन में कभी मेरे मुख से नहीं फूटे थे। आगे चलकर मैं पूरी तरह से अपनी सुध-बुध खो बैठा। होश में आने पर मित्रों ने बताया कि तीन दिन-रात मैं पूर्णतया बेसुध स्थिति में पड़ा हुआ था।’
हम मित्रों ने यही समझा कि यह मर गया। विद्युत् लगाते समय वह
धमनी, तंतु को क्रूरता से खींच रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मेरे शरीर में भूत-प्रेत का प्रवेश हो रहा है और यातनाओं के आवेग में मैं उन अश्लील शब्दों का उच्चारण करते हुए चिल्लाता रहा जो जीवन में कभी मेरे मुख से नहीं फूटे थे। आगे चलकर मैं पूरी तरह से अपनी सुध-बुध खो बैठा। होश में आने पर मित्रों ने बताया कि तीन दिन-रात मैं पूर्णतया बेसुध स्थिति में पड़ा हुआ था।’
हम मित्रों ने यही समझा कि यह मर गया। विद्युत् लगाते समय वह