भयानक रूप से चीखा-चिल्लाया था। उसे विद्युत् पेटी क्यों लगाई गई? क्या उसके ज्वर पर अथवा उन्माद के लिए विद्युत् औषधि थी?
उसके पश्चात् आठ-दस दिनों बाद जब उल्लास किंचित होश में आ गया तब उसे अपने प्रिय कुटंुबियों की चीखें सुनाई देने लगी। पागलपन के दौर में उसे लगा कि जैसे वे सभी अत्यंत अकुलाहट भरे स्वर में उसका नाम पुकार रहे हैं। उसे प्रतीत हुआ, ‘उनके सारे दुःखों की जड़ मैं ही हूं। हाय। हाय। मैं कितना पापी कुलांगार निकला।’
भयानक रूप से चीखा-चिल्लाया था। उसे विद्युत् पेटी क्यों लगाई गई? क्या उसके ज्वर पर अथवा उन्माद के लिए विद्युत् औषधि थी?
उसके पश्चात् आठ-दस दिनों बाद जब उल्लास किंचित होश में आ गया तब उसे अपने प्रिय कुटंुबियों की चीखें सुनाई देने लगी। पागलपन के दौर में उसे लगा कि जैसे वे सभी अत्यंत अकुलाहट भरे स्वर में उसका नाम पुकार रहे हैं। उसे प्रतीत हुआ, ‘उनके सारे दुःखों की जड़ मैं ही हूं। हाय। हाय। मैं कितना पापी कुलांगार निकला।’