उसे जब आप कर्तव्य मानकर ईमानदारी का कृत्य समझते हैं तो उस कृत्य के विषय में अपने आपको दोषी ठहराने की अथवा आत्मनिंदा करने की आपको कुछ भी आवश्यकता नहीं है। आप युवा हैं। एक-न-एक दिन आजन्म कारावास का दंड भुगकर
स्वदेश लौटेंगे, फिर आत्महत्या का कायरतापूर्ण कृत्य क्यों कर रहे हैं? आपके कष्टों का कारण मैं जानता हूं। असहनीय कठोर परिश्रम ही तुम्हारी क्षीणता का कारण है। परंतु मैं अकेला उसे दूर नहीं कर सकता, क्यांेकि मैं सरकारी
उसे जब आप कर्तव्य मानकर ईमानदारी का कृत्य समझते हैं तो उस कृत्य के विषय में अपने आपको दोषी ठहराने की अथवा आत्मनिंदा करने की आपको कुछ भी आवश्यकता नहीं है। आप युवा हैं। एक-न-एक दिन आजन्म कारावास का दंड भुगकर
स्वदेश लौटेंगे, फिर आत्महत्या का कायरतापूर्ण कृत्य क्यों कर रहे हैं? आपके कष्टों का कारण मैं जानता हूं। असहनीय कठोर परिश्रम ही तुम्हारी क्षीणता का कारण है। परंतु मैं अकेला उसे दूर नहीं कर सकता, क्यांेकि मैं सरकारी