सेवक हूं और सरकारी आदेश है कि आप जैसे राजबंदियों से कठोर परिश्रम के काम करवाए जाएं। मुझे उस आदेश का पालन करना ही होगा, तथापि यदि आपको कोई आपत्तिा न हो और वह स्थिति आप इन कष्टों से बेहतर समझते हैं तो सुविधा के लिए पागलों के रूग्णालय में भेज देता हूं-देख लीजिए।’’ पर्यवेक्षक का भाषण सुनकर उल्लासकर ने उसे स्वीकार किया और उसे पागलखाने रवाना किया गया। वहां वह बार-बार पागलपन के दौरे, ऐंठन, घिग्गी बंधना, विलक्षण दृश्यों का आभास आदि मानसिक यंत्रनाएं सहता रहा,
सेवक हूं और सरकारी आदेश है कि आप जैसे राजबंदियों से कठोर परिश्रम के काम करवाए जाएं। मुझे उस आदेश का पालन करना ही होगा, तथापि यदि आपको कोई आपत्तिा न हो और वह स्थिति आप इन कष्टों से बेहतर समझते हैं तो सुविधा के लिए पागलों के रूग्णालय में भेज देता हूं-देख लीजिए।’’ पर्यवेक्षक का भाषण सुनकर उल्लासकर ने उसे स्वीकार किया और उसे पागलखाने रवाना किया गया। वहां वह बार-बार पागलपन के दौरे, ऐंठन, घिग्गी बंधना, विलक्षण दृश्यों का आभास आदि मानसिक यंत्रनाएं सहता रहा,