परंतु जब होश में रहता तब उसे उस कठोर परिश्रम की तुलना में पागलखाने का रूग्णालय भी अधिक सुविधाजनक लगता, और उसे ही मुक्ति का आनंद मानकर वह वहीं दस-बारह वर्ष सड़ता रहा। वह पहले अंदमान में, वहां से मद्रास के पागलखाने में था और वहीं से अंत में बारह-चैदह वर्षों की कैद के पश्चात् उसे मुक्ति मिली।
जिस दिन दोपहर अचानक कर्णकटु चीखें सुनकर भयभीत हुए राजबंदियों को ज्ञात हो गया कि उल्लास पागल हो गया है, उसके दो-चार दिनों के पश्चात्
परंतु जब होश में रहता तब उसे उस कठोर परिश्रम की तुलना में पागलखाने का रूग्णालय भी अधिक सुविधाजनक लगता, और उसे ही मुक्ति का आनंद मानकर वह वहीं दस-बारह वर्ष सड़ता रहा। वह पहले अंदमान में, वहां से मद्रास के पागलखाने में था और वहीं से अंत में बारह-चैदह वर्षों की कैद के पश्चात् उसे मुक्ति मिली।
जिस दिन दोपहर अचानक कर्णकटु चीखें सुनकर भयभीत हुए राजबंदियों को ज्ञात हो गया कि उल्लास पागल हो गया है, उसके दो-चार दिनों के पश्चात्